भूमि-सूक्त का संदेश
'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः'—अर्थात् पृथ्वी मेरी माता है और मैं इसका पुत्र हूँ। यह सूक्ति केवल भावुक उद्गार नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी का उच्चतम वैश्विक चार्टर है।
उद्धरण संदर्भ (Citation):
प्रो. रामदेव शुक्ल et al. (2025). "वैदिक पर्यावरण चिंतन: भूमि-सूक्त और पारिस्थितिकी संतुलन". अक्षय प्रकाशन (akshayprakashan.in).
प्रो. रामदेव शुक्ल et al. (2025). "वैदिक पर्यावरण चिंतन: भूमि-सूक्त और पारिस्थितिकी संतुलन". अक्षय प्रकाशन (akshayprakashan.in).